8 अक्टूबर: सैल्यूट कीजिये भारतीय वायुसेना के 87वें स्थापना दिवस पर उन जांबाजों को, जो आसमान में उड़ान भर करते हैं राष्ट्र की रक्षा



इंडियन एयरफ़ोर्स.. ये शब्द सुनते ही हर उस भारतीय के रौंगटे खड़े हो जाते हैं जो इस राष्ट्र को अपनी मां के सामान पूजता है, भारतमाता की जय बोलता है. आज भारतीय वायुसेना का 87वां स्थापना दिवस है. ये दिन उस जांबाज भारतीय वायुसेना के रणबांकुरों को नमन करने का दिन है, उनको सैल्यूट करने का दिन है, जो धरती से ऊपर हवा में दुश्मनों से देश की रक्षा करते हैं. वायुसेना दिवस के अवसर पर गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरबेस पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है. इस दौरान वायुसेना के जवान लड़ाकू विमानों के साथ करबत दिखा रहे हैं.
देश की राजधानी दिल्ली से सटे गाजियाबाद स्थित हिंडन एयरफोर्स स्टेशन पर आयोजित एयर शो में पहली बार लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे और हैवी लिफ्ट हेलीकॉप्टर चिनूक अपनी ताकत दिखा रहे हैं. इससे पहले सेना प्रमुख बिपिन रावत, भारतीय वायु सेना प्रमुख आरके सिंह भदौरिया और नौसेनाध्यक्ष करमबीर सिंह ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर अमर बलिदानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की. भारतीय वायुसेना की स्थापना 8 अक्टूबर 1932 को की गई थी. तब से लेकर अब तक जब भी भारत की ओर दुश्मन ने आँख उठाकर देखा है, भारतीय वायुसेना के जवानों ने अपने शौर्य तथा पराक्रम से दुश्मन के परखच्चे उड़ाए हैं.
आजादी (1950 में पूर्ण गणतंत्र घोषित होने) से पूर्व इसे रॉयल इंडियन एयरफोर्स के नाम से जाना जाता था और 1945 में द्वितीय विश्वयुद्ध में इसने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. आजादी (१९५० में पूर्ण गणतंत्र घोषित होने) के पश्च्यात इसमें से “रॉयल” शब्द हटाकर सिर्फ “इंडियन एयरफोर्स” कर दिया गया. आज़ादी के बाद से ही भारतीय वायुसेना पडौसी मुल्क पाकिस्तान के साथ चार युद्धों व चीन के साथ एक युद्ध में अपना योगदान दे चुकी है. अब तक इसने कईं बड़े मिशनों को अंजाम दिया है जिनमें ऑपरेशन विजय – गोवा का अधिग्रहण, ऑपरेशन मेघदूत, ऑपरेशन कैक्टस , ऑपरेशन पुमलाई शामिल है. इसके अलावा रतीय वायुसेना संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन का भी सक्रिय हिसा रही है.
फिलहाल भारतीय वायुसेना ने हिन्दुस्तान के जन-जन के दिल में अपने जिस शौर्य तथा पराक्रम के कारण जगह बनाई है, वो है पाकिस्तान के बालाकोट में इस्लामिक आतंकी दल जैश-ए-मोहम्मद के ठिकानों पर एयरस्ट्राइक. जब 14 फरवरी को पुलवामा में जैश ए मोहम्मद के हमले में राष्ट्र्रक्षक CRPF के 40 से ज्यादा जवानों की जान गई तो राष्ट्र आक्रोशित हो उठा. पूरा देश एक सुर में अपने जवानों के बलिदान का बदला लेने की मांग कर रहा था. एक साथ 40 जवानों के शव को देख राष्ट्र की आँखों में आंसू तो थे ही लेकिन बदला इसका लेने के लिए शोले भी दहक रहे थे.
इसके बाद भारतीय वायुसेना ने मोर्चा संभाला. CRPF के जवानों का बलिदान व्यर्थ न जाएगा, इस संकल्प के साथ भारतीय वायुसेना ने 27 फरवरी की रात्री सीमा पार करते हुए पाकिस्तान के बालाकोट सहित 3 जगह एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया. भारतीय वायुसेना के जवानों ने अद्भुत शौर्य तथा पराक्रम का नमूना पेश करते हुए 300 से ज्यादा इस्लामिक आतंकियों को मौत के घाट उतार दिया. भारतीय वायुसेना जब पाकिस्तान में बमवर्षा कर इस्लामिक आतंकियों को जहन्नुम भेज रही थी तो उसके रौद्र रूप को देख पाकिस्तान की जवाब देने की भी हिम्मत न हुई. अगले दिन जब देश सोकर उठा तो पता चला कि पाकिस्तान में कोहराम मचा हुआ था.
ये वो समय था जब भारत ने एयरफ़ोर्स के अपने जवानों का शौर्य देखा था. इसके बाद पाकिस्तान ने दिन में इसका प्रतिकार करने की नापाक कोशिश भी की लेकिन इस बार पुनः भारतीय वायुसेना अलर्ट थी. जैसे ही पाकिस्तानी फाइटर जेटों ने भारत में घुसपैठ की कोशिश की, पहले से तैयार भारतीय वायुसेना ने जवाबी धावा बोल दिया. मिग-21 उड़ा रहे विंग कमांडर अभिनंदन ने पाकिस्तान ने F-16 को मार गिराया. इसके बाद देश की नहीं बल्कि दुनिया ने भारतीय वायुसेना तथा विंग कमांडर अभिनंदन की बहादुरी देखी.
इससे पहले भी तमाम ऐसे मौके आये जब भारतीय वायुसेना के जवानों ने दुश्मनों को ठिकाने लगाते हहुए राष्ट्र की रक्षा की. भारत के राष्ट्रपति भारतीय वायु सेना के कमांडर इन चीफ के रूप में कार्य करते है. वायु सेनाध्यक्ष, एयर चीफ मार्शल (ACM), एक चार सितारा कमांडर है और वायु सेना का नेतृत्व करते है. भारतीय वायु सेना में किसी भी समय एक से अधिक एयर चीफ मार्शल सेवा में कभी नहीं होते. भारतीय वायुसेना इस संसार की चौथी सबसे बड़ी वायुसेना है. भारतीय वायुसेना से बड़ी वायुसेना सिर्फ रूस अमेरिका तथा चीन की है.
भारतीय वायु सेना का आदर्श वाक्य गीता के ग्यारहवें अध्याय से लिया गया है और यह महाभारत के महायुद्ध के दौरान कुरूक्षेत्र की युद्धभूमि में भगवान श्री क्रष्ण द्वारा अर्जुन को दिए गए उपदेश का एक अंश है. भारतीय वायुसेना का आदर्श वाक्य है- ‘नभ: स्पृशं दीप्तम’. वायुसेना ध्वज, वायु सेना निशान से पृथक, नीले रंग का है जिसके प्रथम एक चौथाई भाग में राष्ट्रिय ध्वज बना हुआ है और मध्य भाग में राष्ट्रिय ध्वज के तीनों रंगों अर्थात्‌ केसरिया, श्वेत और हरे रंग से बना एक वृत्त (गोलाकार आकृति) है. यह ध्वज 1951 में अपनाया गया.