रायबरेली का अंतिम कांग्रेसी किला भी ध्वस्त होने की कगार पर.. विधायक अदिति सिंह के बाद एक और बड़ा झटका सोनिया को





उत्तर प्रदेश में कांग्रेस के सबसे मजबूत गढ़ अमेठी को फतह करने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी की नजर सूबे में कांग्रेस के अंतिम किले रायबरेली पर है. 2019 के लोकसभा चुनावों में अमेठी से राहुल गांधी को हराने के बाद अब भारतीय जनता पार्टी रायबरेली में कांग्रेस की नींव हिलाने की किशिशों में जुट गई है. इसका संकेत तो बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनावों में ही दे दिया था जब भाजपा ने कभी कांग्रेस के खास सिपहसलार दिनेश प्रताप सिंह को सोनिया गांधी के खिलाफ मैदान में उतारा था. दिनेश  प्रताप सिंह हालाँकि सोनिया को हरा तो नहीं सके थे लेकिन उन्होंने मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी.
अमेठी पहले ही छीन चुकी भाजपा अब यूपी में कांग्रेस के इकलौते किले रायबरेली को फतह करने के प्रयासों में जुटी हुई है. इसीलिये बीजेपी अब कांग्रेस विधायक अदिति सिंह को अपने खेमे में लाने में लगी है.  विधानमंडल के विशेष सत्र के दौरान दो दिनों में हुए घटनाक्रम ने सत्ताधारी दल की रणनीति के साथ ही कमजोर होती कांग्रेस की काफी हद तक तस्वीर साफ कर दी है. विधानसभा के विशेष सत्र में शामिल न होकर कांग्रेस ने भाजपा का शो फीका करने की कोशिश की लेकिन, रायबरेली सदर की कांग्रेस विधायक अदिति सिंह ने सदन में उपस्थित होकर अपने ही दल के अभियान को पलीता लगा दिया.
कांग्रेस की मुश्किलें यहीं नहीं थमीं बल्कि इसके साथ ही अब तक पर्दे के पीछे से भाजपा का साथ दे रहे रायबरेली के हरचंदपुर से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह ने गुरुवार को सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को आज का ‘महात्मा गांधी’ कह कर अपना इरादा साफ कर दिया है. भाजपा ने पिछले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की परंपरागत सीट अमेठी जीतकर राहुल गांधी को न केवल अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने पर मजबूर कर दिया, बल्कि रायबरेली में भी चूलें हिला दीं.
रायबरेली से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी चुनाव जीत गईं लेकिन, भाजपा ने वहां उनके प्रमुख सहयोगियों को अपने पाले में करने का सिलसिला शुरू कर दिया. चुनाव से पहले विधान परिषद में कांग्रेस दल नेता दिनेश प्रताप सिंह को भाजपा ने अपने पाले में कर लिया. दिनेश ने लोकसभा चुनाव में सोनिया को जबर्दस्त टक्कर देते हुए उनकी जीत का अंतर काफी कम किया. दिनेश सिंह के बाद अदिति सिंह के सुर अपने दल के खिलाफ हो गए हैं. अदिति सिंह के क्रिया कलापों से लग रहा है कि भगवा दल से उनकी नजदीकी बढ़ रही है तथा आने वाले समय में वह कांग्रेस को झटका देकर बीजेपी से जुड़ सकती हैं.
बता दें कि रायबरेली के पूर्व बाहुबली विधायक अखिलेश सिंह की पुत्री अदिति सिंह को 2017 में चुनाव मैदान में उतारकर कांग्रेस ने अपनी जमीन मजबूत की थी, लेकिन अब निगाहें अदिति के अगले कदम पर टिकी हैं. उम्मीद यही है वह भाजपा का दामन थामेंगी. रायबरेली की ही हरचंदपुर सीट से कांग्रेस विधायक राकेश सिंह भाजपा में शामिल हो चुके एमएलसी दिनेश प्रताप सिंह के सगे भाई हैं. वह अब तक पर्दे के पीछे से भाजपा का साथ दे रहे थे लेकिन, गुरुवार को वह खुलकर भाजपा के समर्थन में आ गए तथा पीएम मोदी व सीएम योगी को आज का महात्मा गांधी करार दिया.
विधानसभा चुनाव 2017 में रायबरेली की पांच में से दो-दो सीटों पर भाजपा और कांग्रेस जीतीं, जबकि एक सीट समाजवादी पार्टी के पाले में गई. अब यदि अदिति और राकेश पाला बदलते हैं तो चार सीटों पर भाजपा विधायक हो जाएंगे और कांग्रेस शून्य हो जाएगी. अदिति सिंह ने गांधी जयंती पर कांग्रेस  के विरोध के बाद भी विधानसभा के विशेष सत्र में भाग लेकर अपने इरादे जता दिए हैं. इस कारण कांग्रेस द्वारा कार्यवाई को लेकर अदिति सिंह ने साफ़ कर दिया कि कांग्रेस पार्टी जो भी फैसला लेना चाहे, ले सकती है. अदिति सिंह ने कहा कि सत्र में भाग लेकर उन्होंने पार्टी से ऊपर देश को रखा है तथा वह हमेशा देश को सर्वोपरि रखती हैं.