उसे गलतफहमी थी कि वो अमेरिका का सीनेटर है जिसे कोई रोक नहीं सकता.. गलतफहमी दूर कर दी मोदी सरकार ने


ये नये भारत का एक नया स्वरूप माना जा रहा है जिसने दुनिया की आँख में आँख मिला कर अपने वजूद को मजबूती से सबके सामने रखा है.. अब विरोध में गलत कोई भी करे उसको उसी अनुसार से मिल रहा है जवाब.. 
चाहे वो पड़ोस में मौजूद आंतकी मुल्क पाकिस्तान हो या गद्दार देश चीन.. हर किसी को मिल रहा उसके ही अनुसार जवाब, लेकिन इसी बीच भारत की सीमओं से बहुत दूर दुनिया में दादागीरी चलाने वाला अमेरिका भी अब भारत की ताकत का एहसास कर रहा है .
अमेरिकी सीनेटर ने सोचा होगा कि वो तो उस देश का सीनेटर है जिसके लिए बाकी देश कारपेट लगा कर प्रतीक्षा करते हैं . अब तक कश्मीर को द्विपक्षीय मामला बताने वाली सेक्युलर राजनीती को धता बता कर जैसे ही मोदी सरकार ने पाकिस्तान को पस्त किया , उसके तमाम चाहने वालो में खलबली मच गई . 
इसी में से एक थे अमेरिका के सीनेटर जो पाकिस्तान को खुश करने के लिए कश्मीर का दौरा करना चाह रहे थे लेकिन उनकी अमेरिकी दादागिरी पस्त हो गई भारत सरकार की अटलता से..
जम्मू कश्मीर पर अमेरिकी सीनेटर कश्मीर का दौरा कर हालात की जानकारी लेना चाहते हैं। भारत सरकार ने डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता को अनुमति देने से इनकार कर दिया है। करांची में जन्में और कोडइकनाल में स्कूली पढ़ाई करने वाले क्रिस वान के पिता श्रीलंका में अमेरिकी राजदूत थे।  
क्रिस वान हॉलेन वो अमेरिकी सीनेटर हैं जिन्हें जम्मू कश्मीर का स्पेशल स्टेटस हटने के बाद सरकार ने अनुमति देने से इनकार कर दिया है। वान हॉलेन ने कहा, ‘मैं कश्मीर जाकर देखना चाहता था कि वहां क्या हो रहा है लेकिन भारत सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी