कोर्ट परिसर विवाद में अब तक का सबसे बदनसीब स्टाफ है सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह.. 5 साल से जेल में बंद दरोगा का तबाह हो चुका है पूरा परिवार जबकि आधे दर्जन मामलों में नामजद था नबी अहमद जिसे बताया गया वकील


ये वो बुझी हुई राख है जो ऐसे मामले के आते ही फिर से धधक उठती है. जब भी कचेहरी परिसर में कोई खाकी वर्दी वाला अपने साथ अन्याय की बात बतायेगा तब – २ सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह का नाम खुद से ही दिल और दिमाग में गूँज जाएगा. कम नही होते 5 साल किसी को जेल में काटते हुए और वो भी तब जब वीडियो में साफ़ साफ़ सच्चाई दिख रही हो.. खाल से भी प्रिय वर्दी को शरीर से नोच लेना और कैदियों के बीच में सिर्फ इसलिए रख देना क्योकि कुछ लोगों के शोर को दबाना था..

भीड़तंत्र को खुश करने के लिए जिस प्रकार से सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की बलि ली गई उसके बाद इसको कहने में जरा सा भी संकोच नहीं होगा कि कचेहरी परिसर में हुए विवाद मामले में अब तक पूरे भारत की पुलिस का सबसे बदनसीब पुलिस स्टाफ सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह ही है.. अखिलेश यादव की सरकार में शैलेन्द्र सिंह के हाथो नबी अहमद की मौत की खबर ने वो कोहराम मचाया था जिसके आगे आज दिल्ली पुलिस का विवाद भी बौना नजर आएगा, और उसी का फल है कि अब तक दरोगा बाहर नहीं निकल सका..

२ बेटियों और १ मासूम बेटे का पिता शैलेन्द्र सिंह है जो आज तक नहीं जान पाया है कि कुछ लोगों की वो संतुष्टि कब पूरी होगी और वो अपनी उस सबसे छोटी बेटी से मिल पायेगा जिसकी शक्ल भी अब तक उसने ठीक से नहीं देखी है.. देखता भी कैसे , उसकी बड़ी बेटी जो मात्र 5 साल की थी और अपने जेल में बंद पिता से पेशी पर मिलने अदालत जाती है तो उसके आगे उसकी माँ के बाल नोचे जाते हैं और जब वो मम्मी मम्मी कह कर अपनी माँ की तरफ दौड़ती है तो उसको भी उठा कर पटक दिया जाता है..

संसद पर हमला करने वाले अफजल गुरु के बेटे की मार्कशीट यहाँ के मीडिया की सुर्खियाँ रही हैं लेकिन सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पत्नी को हत्यारे की बीबी और उसकी बेटी को हत्यारे की बेटी चीख चीख कर कहा गया और हालात ये बने की उनकी उस समय हिम्मत कर के मदद करने वाले IG अमिताभ ठाकुर तक को विधानसभा तक में ऐसे उछाला गया जैसे कि उन्होंने एक पुलिसवाले की मदद कर के कोई बहुत बड़ा गुनाह कर दिया हो.. आज पुलिस समर्थक बने तमाम मीडिया की उस समय की खबरें भी गूगल में मिल जायेंगी..

5 साल पहले ये मामले जिस नबी अहमद से जुड़ा था वो भले ही कुछ लोगों के हिसाब से वकील रहा हो पर पुलिस रिकार्ड में उसके ऊपर आधे दर्जन से ज्यादा मामले दर्ज थे.. इसके बाद भी एक वीडियो जिसमे वो साफ़ साफ़ अकेले सब इंस्पेक्टर को पीटते दिखाई दे रहा है एक भीड़ के साथ उस पर भी किसी ने ध्यान नहीं दिया और सिर्फ और सिर्फ एक मांग को ले कर अड़े रहे की सब इंस्पेक्टर को फांसी हो.. कभी उसको ले जा रहे वाहन पथराव किया गया.. न्याय की मांग अन्याय के साथ होती रही ..

अगर IPS अजय पाल शर्मा ने सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र की बेटी की फीस इस बार न जमा करवाई होती तो शायद अब तक बेटी बचाओ बेटी पढ़ो का नारा प्रयागराज में दम तोड़ चुका होता.. सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के परिवार में मोबाईल नम्बर 9918366628 पर बात करने पर सब कुछ तबाह होने के बाद भी उस स्वाभिमानी परिवार ने बताया की उन्हें कुछ भी नहीं चाहिए बस कोई सरकार तक ये संदेश पहुचा दे कि दरोगा जी निर्दोष हैं और उन्हें अब रिहा कर के उनकी वर्दी दे दी जाय.. इतनी प्रताड़ना के बाद भी वर्दी से लगाव सुन कर अजीब सा लगा..

नबी अहमद विवाद में जेल जाने के बाद सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह की पैतृक जमीन को पड़ोसियों ने कब्जा कर लिया ये सोच कर कि अब वो कभी वापस नहीं आएगा.. जेल में रहते हुए ही सब इंस्पेक्टर के माता और पिता दोनों सदमे में देह त्याग गये. बाद में उनका एक भाई भी मानसिक रूप से विक्षिप्त हो गया.. पैरवी जब ससुराल पक्ष को करनी हुई तो सब इंस्पेक्टर का एक साला भी एक्सीडेंट में चल बसा और उसी साले के दुःख में सब इंस्पेक्टर की सास भी चल बसी.. जेल में बंद दरोगा ये सब सलाखों के पीछे चीखते हुए झेलता रहा..

अराजपत्रित कर्मियों ने अपने पेट को काट कर जो हो सकता था वो मदद इस परिवार को दी लेकिन बड़े साहबो में शायद ही कुछ गिने चुने लोगों को छोड़ कर सामने आया.. IG अमिताभ ठाकुर और SP अजय पाल शर्मा जैसे २ या अधिकतम 4 नाम ही है जो इस परिवार के दर्द को समझ सके.. इस परिवार की पीड़ा वर्तमान सरकार से भी है जिसने इस मामले को ज्यों का त्यों छोड़ दिया और सरकार बदलने पर हमारे साथ न्याय होगा जैसी उम्मीदे शीशे की तरह टूट गईं..

एक बार फिर से अदालत परिसर में पुलिस की प्रताड़ना ने सब इंस्पेक्टर शैलेन्द्र सिंह के मामले को सबके जेहन में डाल दिया है.. वो शैलेन्द्र सिंह जिसका जीवन नर्क से भी बदतर हो चुका है और कभी चौकी थाने के बजाय अब जेल की सलाखें ही उसका मुकद्दर.. न्याय की जो आस नई सरकार बनने के बाद उन्हें जगी थी वो भी अब लगभग टूट सी गई है और शायद योगी सरकार भले ही अखिलेश सरकार के तमाम कामो से सहमत न हो पर शैलेन्द्र सिंह को मिली प्रताड़ना से सम्भवतः ये सरकार भी उतनी ही सहमत है .. अन्यथा अब तक इस पर विचार जरूर करती.