महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बड़ी खबर.. राज्य में शिवसेना की सरकार बनने पर लगभग लगी मुहर, लेकिन बीजेपी के साथ नहीं


महाराष्ट्र में सरकार गठन को लेकर बीजेपी तथा शिवसेना के बीच जारी खींचतान थमती हुई नजर नहीं आ रही है. एकतरफ जहाँ शिवसेना सीएम पद को लेकर अड़ी हुई है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपी शिवसेना को सीएम पद देने पर कतई राजी नहीं है. ख़बरें तो ये भी सामने आई हैं कि भारतीय जनता के राष्ट्रीय अध्यक्ष महाराष्ट्र सरकार में शिवसेना को गृहमंत्री का पद देने को भी तैयार नहीं हैं. इस बीच एक बड़ी खबर ये सामने आई है कि महराष्ट्र में बिना बीजेपी के ही शिवसेना की सरकार बनने जा रही है.
मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, महाराष्ट्र में शिवसेना तथा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी(एनसीपी) मिलकर सरकार बनाने जा रही है. इस सरकार में कांग्रेस शामिल नहीं होगी लेकिन बीजेपी को सत्ता से बाहर रखने के लिए बाहर से समर्थन देगी. ये खबरें सामने आने के बाद सियासी गलियारों में हड़कंप मच गया है. कल ये भी खबर सामने आई थी कि जिस तरह से शिवसेना ने बीजेपी से ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद माँगा था, उसी तरह से शिवसेना तथा एनसीपी के बीच ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री पद पर समझौता हो सकता है.
बता दें कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के अध्यक्ष शरद पवार ने सोमवार को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के साथ मुलाकात की. इस मुलाकात के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में नई तस्वीर सामने आने की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं. मीडिया सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक़, एनसीपी के एक नेता ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि पार्टी शिवसेना के नेतृत्व वाली सरकार का हिस्सा बनने की इच्छुक है. इसके लिए वह स्पीकर पद पर अपना नेता चाहती है. पार्टी चाहती है कि कांग्रेस इस गठबंधन को बाहर से समर्थन दे तथा कांग्रेस इसके लिए लगभग मान जायेगी.
हालाँकि खबरें ये भी थी कि शिवसेना तथा एनसीपी के बीच ढाई ढाई साल के मुख्यमंत्री पद पर समझौता होगा. हालाँकि अब एनसीपी के नेता ने कहा है कि हमने 1995 के सेना-बीजेपी जैसा फॉर्म्युला सुझाया है. इसमें सेना का नेता चीफ मिनिस्टर था और बीजेपी का नेता उपमुख्यमंत्री. हमने कहा है कि सेना का नेता सीएम हो सकता है और डेप्युटी सीएम एनसीपी का नेता होगा. हालाँकि सोमवार को सोनिया गांधी से मीटिंग के बाद पवार ने कहा कि राज्य में सरकार बीजेपी और शिवसेना को बनानी थी, आखिर उनके पास संख्या थी. साथ ही उन्होने कहा था एनसीपी को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला था, लेकिन ‘आप भविष्य के बारे में कुछ नहीं कह सकते.
पवार ने कहा कि उन्हें शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे से कोई प्रस्ताव नहीं मिला है, साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि भविष्य के बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता. खबर है कि पवार ने सोनिया गांधी से कहा है कि वह शिवसेना से दूरी बनाने के अपने स्टैंड को बदलें. इसके बाद ही ये खबर आई है कि शिवसेना एनसीपी सरकार को कांग्रेस बाहर से समर्थन देने पर विचार कर रही है. खबर ये भी है कि कांग्रेसी नेताओं का कहना है कि सेना को बीजेपी के साथ अपने गठबंधन से बाहर आना होगा, इसके बाद ही उनकी पार्टी किसी तरह के गठबंधन के बारे में विचार करेगी.