हमने NDA नहीं छोड़ा है तो बीजेपी ने संसद में हमारी सीट बदलकर विपक्ष की तरफ क्यों की- शिवसेना



महाराष्ट्र में सरकार गठन को सियासी कश्मकश लगातार जारी है. अभी तक ये साफ़ नहीं हो पा रहा है कि क्या शिवसेना महाराष्ट्र में एनसीपी तथा कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बना पायेगी?
 हालाँकि खबर लिखे जाने के समय सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने शिवसेना सरकार का समर्थन करने पर हामी भर दी है. लेकिन इस बीच शिवसेना की तरफ से एक ऐसा बयान आया है जिसने सियासत के गलियारों में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है.
दरअसल मोदी सरकार में शिवसेना कोटे से मंत्री अरविंद सावंत इस्तीफ़ा दे चुके हैं तथा उन्होंने कहा था कि शिवसेना अब बीजेपी से अलग हो गई है. लेकिन अब शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा है कि उनकी पार्टी अभी NDA में ही है, हमने NDA नहीं छोड़ा है. दरअसल राज्यसभा में शिवसेना की सीट बदल दी गई है, इस पर संजय राउत विफर गये हैं. उन्होंने कहा है कि जब उन्होंने NDA नहीं छोड़ा है तब उनकी सीट क्यों बदली गई है.
संजय राउत ने सभापति वेंकैया नायडू को पत्र लिखकर सीट बदले जाने पर आश्चर्य प्रकट किया और आरोप लगाया कि यह शिवसेना को आहत करने के लिए किया गया है. शिवसेना सांसद ने राज्यसभा के सभापति को लिखी चिट्ठी में कहा, ‘जानकर हैरान हूं कि राज्यसभा में मेरी सीट बदलकर तीसरी से पांचवीं कतार में कर दी गई है. 
किसी ने यह फैसला जानबूझकर शिवसेना की संवेदना को चोट पहुंचाने और हमारी आवाज दबाने के लिए किया है.’ राउत ने पत्र में कहा कि अभी शिवसेना के एनडीए से अलग होने का आधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है. ऐसे में यह फैसला समझ से परे है. उन्होंने इस कदम को राज्यसभा की गरिमा पर प्रहार बताया.
राउत ने लिखा है कि मुझे इस अनपेक्षित कदम की वजह इसलिए भी समझ नहीं आई क्योंकि (शिवसेना को) एनडीए से हटाने की अभी औपचारिक घोषणा नहीं हुई है. इस फैसले से सदन की गरिमा को ठेस पहुंची है. शिवसेना सांसद ने सभापति से दोबारा पहली, दूसरी या तीसरी पंक्ति में बैठने की अनुमति देने की मांग की.
 उन्होंने कहा कि इन पंक्तियों में किसी एक में उनके बैठने की व्यवस्था कर सदन की मर्यादा बरकरार रखी जाए. संजय राउत की इस चिट्ठी के बाद ये चर्चा भी हो रही है कि क्या शिवसेना इस बहाने बीजेपी का हाथ मिलाने का संकेत दे रही है? सच क्या है, इसे जानने के लिए सभी की निगाहें महाराष्ट्र की सियासत पर टिकी हुई हैं.