आखिर कौन था वो करीम लाला जिससे मिलने के लिए जाती थीं पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी


राज्यसभा सांसद तथा शिवसेना नेता संजय राउत ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि देश की सियासत में भूचाल ला दिया है. संजय राउत द्वारा दावा किया गया है कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई में पुराने डॉन करीम लाला से मिलने आती थीं. बता दें कि करीम लाला को मुंबई में अंडरवर्ल्ड का डॉन कहा जाता था. करीम लाला पठान गैंग का मुखिया था. ऐसे में ये जानना जरूरी है कि  आखिर करीम लाला कौन था, जिसके साथ इंदिरा गांधी की मुलाक़ात की ख़बरें सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है.
बता दें कि करीम लाला का जन्म अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में 1911 में हुआ था. उसका पूरा नाम अब्दुल करीम शेर खान था. उसने 21 साल की उम्र में अफगानिस्तान छोड़कर मुंबई आने का फैसला किया. वह पेशावर (पाकिस्तान) के रास्ते मुंबई पहुंचा. मुंबई आने के बाद करीम लाला ने छोटे मोटे काम धंधे शुरू कर दिए लेकिन इससे होनी वाली आमदनी उसका मन नहीं भर सकी. लिहाजा उसने मुंबई के ग्रांड रोड स्टेशन के पास एक जुए का अड्डा खोल दिया। देखते ही देखते यह अड्डा मशहूर हो गया.
करीम लाला के जुए के अड्डे पर यहां कई बड़े सेठ और व्यापारी आते थे. यहां से उसकी जान पहचान बढ़ने लगी. 1940 तक उसके इस धंधे में अच्छी पकड़ बना ली. इसके बाद उसने हीरे और जवाहरात की तस्करी शुरू कर दी. ये भी कहा जाता है कि अब्दुल करीम शेर खान उर्फ़ करीम लाला मुंबई में मौजूद बाकी  दोनों बड़े डॉन – वरदराजन मुदलियार (वरदा भाई) और मस्तान मिर्ज़ा (हाजी मस्तान) के साथ मिलकर बेखौफ गैरकानूनी धंधे चलाता रहा, लेकिन अपनी इमेज चमकाने के लिए वह हमेशा गरीबों का मददगार बना रहा.
करीम लाला पिछली सदी में ’60 के दशक से लगभग 20-25 साल तक हिन्दुस्तान की आर्थिक राजधानी मुंबई (तब बॉम्बे) के सबसे खतरनाक माफिया डॉनों में से एक के तौर पर गिना जाता रहा है. जानकारी के मुताबिक़, 60 के दशक में मुंबई बंदरगाह पर मामूली मज़दूर के तौर पर काम करने वाला करीम लाला जल्द ही पठानों के गैंग में शामिल हो गया था, जो उस समय तक गुजराती ज़ायदाद मालिकों और व्यापारियों के लिए देनदारों से वसूली का काम किया करता था. लेकिन बहुत लम्बे वक्त तक ऐसा नहीं रहा, और जल्द ही करीम लाला पठान गैंग का सरगना बन गया, जो तब तक सुपारी लेकर कत्ल करने से लेकर जबरन घर खाली करवाने, अगवा और जबरन वसूली तक के काम करने लगा था.
करीम लाला ने इन धंधों के अलावा गैरकानूनी शराब और सट्टे का धंधा भी बेहद कामयाबी से चलाया, और वरदराजन मुदलियार और हाजी मस्तान के साथ समझौता कर इलाके बांट लिए,ताकि एक-दूसरे से टकराव के बिना तीनों गैंग अपने-अपने गैरकानूनी धंधे चलाते रहें. दक्षिणी मुंबई के डोंगरी, नागपाड़ा, भिंडी बाज़ार और मोहम्मद अली रोड जैसे मुस्लिम इलाकों में ‘बेखौफ राज’ चलाने वाले करीम लाला ने ’70 के दशक के अंत में बिगड़ती सेहत को देखकर पठान गैंग और अपना गैरकानूनी कारोबार अपने भतीजे समद खान को सौंप दिया, और अपने कानूनी धंधों में ध्यान देने लगा, जिनमें होटल और एक ट्रैवल एजेंसी शामिल थे.
ये भी कहा जाता है कि अपने कामयाबी के दिनों में करीम लाला बॉलीवुड की जानी-मानी हस्तियों को अपनी दावतों और ईद पर आयोजित कार्यक्रमों में बुलाया करता था, और कई हिन्दी फिल्मों में करीम लाला से मिलते-जुलते किरदार भी रखे गए. यह भी कहा जाता है कि वर्ष 1973 में आई सुपरहिट फिल्म ‘ज़ंजीर’ में प्राण द्वारा निभाए गए ‘शेर खान’ के हावभाव करीम लाला से मिलते-जुलते थे. कहा जाता है कि तस्करी के धंधे में दाऊद इब्राहिम के आने के बाद करीम लाला परेशान हो गया था. इन दोनों के बीच दुश्मनी काफी बढ़ गई थी. इस दौरान करीम लाला ने दाउद को मुंबई में लात-घूंसों से खूब पीटा था. इससे दाऊद काफी चोटिल हो गया था. करीम लाला की मौत 90 साल की उम्र में 19 फरवरी, 2002 को हुई.
ये था वो करीम लाला जिससे मिलने के लिए देश की पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जाया करती थीं.. ये दावा शिवसेना नेता संजय राउत ने किया है