ईसाइयों के सर्वोच्च पोप फ्रांसिस ने एक महिला को थप्पड़ मार कर महिला के सम्मान में दिया लम्बा भाषण


ये ईसाई मत में सबसे बड़े मजहबी नाम माने गये हैं. इनको ईसाई वर्ग में हर कोई आज के समय में पूजता है, दुनिया भर के तमाम चर्च और इबादतगाह इनके बताये रास्ते पर ही चलते हैं. अभी हाल में ही ये दुनिया के सबसे क्रूर आतंकी माने जाने वाले रोहिग्या के कैम्प बंगलादेश गये थे और वहां पर इन्होने म्यन्मार की फ़ौज को शांति बरतने की अपील के साथ बौद्धों की सक्रियता को भी गलत रूप में प्रस्तुत करते हुए खुद को शांति का मसीहा बताने और जताने की हर सम्भव कोशिश की थी.
लेकिन अचानक ही वो तमाम समीकरण और उनकी तमाम बातें हवा हवाई साबित हुई क्योकि एक कार्यक्रम में एक महिला जो उनके प्रति भक्ति भाव से आकर्षित थी, उसे उन्होंने खुलेआम थप्पड़ मारा और सबके आगे बदतमीजी की.. इसके बाद उनके पद और कद को भूल कर उनका व्यापक विरोध शुरू हो गया और विरोध के जायदा बढ़ जाने के बाद उन्होंने खुद को भी एक आम इन्सान की तरह गुस्से वाला बताते हुए अपना भी आपा उस समय खो देने के लिए सार्वजानिक रूप से माफ़ी मांगी.
पोप फ्रांसिस ने श्रद्धालुओं का अभिवादन करने के दौरान उन्हें पकड़ लेने वाली महिला के हाथ पर थप्पड़ मारने को लेकर उससे माफी मांगी। इतना ही नहीं इसके कुछ देर बाद उन्होंने अपने भाषण में ‘महिलाओं के खिलाफ हर तरह की हिंसा’ की निंदा की. 
टि्वटर पर भी लोगों ने पोप की तत्काल कार्रवाई पर टिप्पणी की। फ्रांसिस ने सेंट पीटर्स स्क्वायर पर बच्चों का अभिवादन किया और वे जब मुड़े तब एक महिला कुछ चिल्लाई और उनका हाथ पकड़ लिया। पोप नाराज हो गए और उन्होंने महिला के हाथ पर थप्पड़ जड़ दिया