बिहार में कब्ज़ा हो रहे हैं प्राचीन हिन्दू सम्राटो की धरोहरें . मुख्यमंत्री के आदेश के बाद भी जिला नवादा में हो रहा अनर्थ


भारत सरकार ने जब सडको को चौड़ा करने और अन्य विकास कार्य करने की शुरुआत की तब उनके आगे सबसे बड़ी समस्या आई थी उन अतिक्रमणों को हटवाने की जो कुछ भूमाफियाओं ने जबरन कब्जा कर ली है. न जाने कितनी मजारे , कितनों के घर , इबादतगाह और झुग्गियो ने वो तमाम जमीने धीरे धीरे कब्जा कर ली जो कहीं रेलवे की थी तो कहीं सेना की. लेकिन उन सब से आगे बिहार के नवादा जिले में मामला बढ़ता दिखाई दे रहा है जहाँ पर सीधे सीधे प्राचीन धरोहरों पर कब्जा शुरू हो गया है.
ध्यान देने योग्य है कि अभी कुछ दिन पहले ही बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार ने सभी जनपदों के अधिकारियो ओ स्पष्ट आदेश जारी किये थे कि किसी भी सरकारी भूमि पर कोई भी अतिक्रमण नहीं होना चाहिए और अगर ऐसा है तो न सिर्फ अतिक्रमण को हटाओ बल्कि ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही भी करो. उस आदेश के बाद ऐसा माना जा रहा था कि उन तमाम लोगों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही होगी जिन्होंने सरकारी जमीनों को कब्जा कर रखा है.
लेकिन बिहार के जिला नवादा प्रखंड रजौली में कुछ अधिकारियो ने जिस प्रकार से इन आदेशो के प्रति उदासीनता दिखाई है उसके चलते भूमाफियाओं के हौसले इतने बढ़ गये कि उन्होंने प्राचीन धरोहरों पर भी कब्जा जमाना शुरू कर दिया. यहाँ पर अधिकारी का नाम चन्द्रशेखर है जिस से स्वतः ही राष्ट्रभक्ति की झलक मिलती है लेकिन इनके कार्यो के चलते इलाके में वो जमीने भी कब्जा हो रही हैं जो प्रचीन धरोहर के रूप में आने वाले समय के लिए एक कीमती निशानी हो सकती है.
कब्जा होती ये भूमि है बिहार के जिला नवादा के रजौली क्षेत्र में पड़ने वाली डीह रजौली जो कि इतिहास के एक हिन्दू सम्राट का अति प्राचीन किला था. ये न सिर्फ एतिहासिक है बल्कि धार्मिक धरोहर है उस प्राचीन हिन्दू राजा की और माना ये भी जा रहा है कि ये स्थान अमूल्य खजाने से भरा हो सकता है. इसी पर धीरे धीरे स्थानीय कुछ बेहद प्रभावी लोगों ने कब्जा जमाना ये सोच कर शुरू कर दिया कि उनका कोई कुछ बिगाड़ नहीं सकता.. शुरुआत में वो सफल रहे और प्रशासन सोता रहा, अंत में उनकी हिम्मत बढती गई.
आखिरकार लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के आदेश का ससमय अनुपालन नहीं होने से अब वहां पर आम लोगों को न्याय नहीं मिल पा रहा है . कब्जा हटाने के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए लोगों को बड़े अधिकारियों से गुहार लगानी पड़ रही है लेकिन उसका भी कोई खास फायदा होता नही दिखाई दे रहा. रजौली अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण कार्यालय में वाद दायर करनेवाले ग्राम:-डीह रजौली निवासी वेदव्रत पांडेय पुत्र रमाकांत पाण्डेय  ने बताया कि उन्होंने अतिक्रमण करने वाले व्यक्तियों के विरूद्ध दिनांक:-09/07/2019 को शिकायत दर्ज करायी थी।
इस सुनवाई के पश्चात  लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी रजौली ने अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया और अंचल अधिकारी को विधिमान्य तरीक़े से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। किन्तु काफी समय बीत जाने के बावजूद अंचलाधिकारी ने अतिक्रमण करने वाले लोगों पे कोई ठोस कार्यवाई नहीं की.. इतना ही नहीं, अब तो शिकायत करने वाले वादी के ऊपर ही तमाम प्रकार से दबाव बनाया जाने लगा है जो बिहार के लचर व्यवस्था का प्रतीक माना जा सकता है.
कुछ अधिकारियो की उदासीनता और कुछ की जातिवादी सोच ने इस धरोहर के अस्तित्व को आज खतरे में ला कर खड़ा कर दिया है. मुख्य मार्गों पर कब्जे के साथ धीरे धीरे इसको बाकी स्थलों से काटने की और अलग थलग करने की साजिश को लगातार अमल दिया जा रहा है और जल्द ही इसको चारो तरफ से घेर कर इसको अपना कब्जा घोषित किया जा सकता है. इसी के साथ एक बड़ी आबादी भी मुख्यधारा से कटने की कगार पर आ गई है जो कभी भी एक बड़े विवाद का कारण भी बन सकती है. अब सवाल ये है कि न सिर्फ धरोहर की रक्षा बल्कि आम जनता के अधिकारों के संरक्षण के साथ भविष्य के एक बड़े भूमि विवाद को निबटाने के लिए बिहार प्रशासन और शासन कितनी सक्रियता दिखाता है