CAA पर हुए दंगे को सख्ती से कुचलने के बाद से ही UP पुलिस के खिलाफ चल रही थीं कई साजिशें. कहीं उसी के चलते तो साजिश के निशाने पर नही आये IPS वैभव कृष्ण ?

चर्चा में एक video है जो प्रथम दृष्टया किसी भी रूप में सही नहीं लग रहा है क्योकि इस video में किसी का चेहरा दिखाया जा रहा है तो किसी की आवाज सुनवाई जा रही है.. वीडियो का अंतिम उद्देश्य उत्तर प्रदेश के तेज तर्रार IPS असफर व् वर्तमान समय में जनपद गौतमबुद्ध नगर की कमान सम्भाल रहे वैभव कृष्ण को बदनाम करना समझ में आ रहा है जबकि वीडियो से किसी भी प्रकार से ये सिद्ध नहीं हो रहा है कि कौन किस से बात कर रहा है और किस उद्देश से ?
फिलहाल आगे बढ़ कर खुद से SSP नॉएडा वैभव कृष्ण ने इस मामले की जांच अपने जनपद से बाहर करवाने की मांग की है इस पर उच्चाधिकरियो ने संज्ञान भी लिया है.. यहाँ सबसे जरूरी बात ये है कि नॉएडा जनपद में अपनी सेवाएँ देने वाले तेजतर्रार कहे जाने वाले पुलिस अधिकारियो को महिलाओं के नाम से बदनाम करने की परम्परा नई नहीं है बल्कि इस से पहले भी यहाँ ऐसी हरकते की जा चुकी हैं. आर्थिक अपराध के गढ़ के साथ नॉएडा ऑनलाइन अपराध , साइबर अपराध व् संगठित अपराध का भी गढ़ रहा है.
अपराध के इन गढ़ों को ढहाने के लिए जिस प्रकार से वैभव कृष्ण ने दिन रात एक कर के प्रयास किये व् न सिर्फ अपने विभाग में छिपे कुछ अवांछित तत्वों को पकड़ा बल्कि मीडिया के नाम से व् कभी सफेदपोश बन कर विभिन्न प्रकार के अपराध करने वाले कई लोगों को सलाखों के पीछे भेजा. उनके खिलाफ साजिशें स्वाभाविक थीं क्योकि वो ऐसा काम कर रहे थे जो बाकी तमाम के लिए लगभग असंभव जैसा था. फ़िलहाल लगभग १ वर्ष से जायदा का कार्यकाल में वो बेदाग़ रहे.
यकीनन उनके ऊपर मुख्यमंत्री का विश्वास रहा होगा और इस विश्वास को तोड़ने के लिए हर संभव कोशिश उनके आने के बाद से जारी थी. ये कोशिशें उनकी भी थीं जिनके कई प्रकार के काले धन व् काले कारनामे अचानक ही रुक गये थे. पहले कभी प्रलोभन से तो कभी दबाव से SSP वैभव कृष्ण को तोड़ने की कोशिश की गई लेकिन जब उसमे से कोई भी एक साजिश कामयाब नहीं हो पाई तब समय का इंतजार किया जाने लगा और साथ ही साजिश का दायरा बड़ा किया जाने लगा.
इस बीच में CAA के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए जिसको पुलिस ने सख्ती से कुचल दिया.. उत्तर प्रदेश पुलिस ने बिना किसी बाहरी बल के इतने बड़े विरोध प्रदर्शन को कुचल कर पूरी दुनिया में अपनी एक विशिष्ट पहिचान बना डाली और इसी के साथ पुलिस का विरोध आपराधिक समाज से निकल कर राजनैतिक मंचो पर होने लगा. गौतमबुद्ध नगर जनपद पर विशेष ध्यान था क्योकि यहाँ दादरी और जारचा जैसे मुस्लिम मिश्रित इलाके होने के बाद भी किसी भी प्रकार का उन्माद नहीं फैलने दिया गया.
यकीनन इसका श्रेय SSP वैभव कृष्ण को ही जाता है. न सिर्फ गौतमबुद्ध नगर बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश पुलिस में वो बहाना खोजा जाने लगा जो दुनिया भर में बनी उत्तर प्रदेश पुलिस की छवि को धूमिल कर सके.. सबसे खास बात ये है कि खुद SSP नॉएडा इस वीडियो के वायरल होने के बाद मीडिया के आगे आये और उन्होंने इसको अपनी छवि के खिलाफ एक गहरी साजिश करार देते हुए मीडिया के तमाम सवालों के उत्तर निर्भीकता से दिए. ये भी एक बड़ा संकेत है उनका खुद के पाक साफ़ होने के विश्वास का.
यहाँ ये भी संभावित है कि प्रदेश के सबसे ईमानदार अधिकारियों में से एक गिने जाने वाले वैभव कृष्ण को निशाना बना कर उत्तर प्रदेश पुलिस को बदनाम करना शायद कुछ साजिशकर्ताओं का शोर्टकट रहा हो. फिलहाल असल सच क्या है ये जाँच के बाद ही पता चल पायेगा लेकिन आम जनता के दृष्टिकोण से देखा जाय तो जनमानस वायरल हुए इस वीडियो की सत्यता पर विश्वास नहीं कर पा रहा है. फिलहाल सबको जांच के उपरान्त सत्य आने की प्रतीक्षा है लेकिन यदि ये मामला आधारहीन व् स्वरचित मिथ्या निकलता है तो इसको रचने वालों पर कठोर कार्यवाही न हुई तो निश्चित तौर पर ये समाज की शांति और सुरक्षा की जिम्मेदारी उठाने वाले, आतंक और अपराध से लड़ते पुलिस बल के लिए किसी भी रूप में सार्थक परिणाम नहीं देगा और इसका असर जनता पर जरूर पड़ेगा .